सोनौली: सरहद पर विकास के नाम की चमक, पर शिक्षा के नाम पर 'सन्नाटा'
सोनौली।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नगर पंचायत सोनौली अपनी भौगोलिक और व्यापारिक महत्ता के कारण पूरे देश में पहचानी जाती है। हर दिन यहाँ से करोड़ों का व्यापार होता है और हजारों पर्यटकों का आवागमन रहता है। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक कड़वा सच छिपा है—25 हजार से अधिक की आबादी वाले इस कस्बे में उच्च शिक्षा के लिए एक भी सरकारी इंटर कॉलेज या पीजी कॉलेज नहीं है।
1. विडंबना: व्यापारिक हब, पर शैक्षिक अभाव
सोनौली को 'गेटवे ऑफ नेपाल' कहा जाता है। एक तरफ जहाँ आधुनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचों पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यहाँ का युवा आज भी बुनियादी उच्च शिक्षा के लिए तरस रहा है। 25 हजार की स्थायी आबादी और आसपास के दर्जनों गांवों के छात्रों के लिए यहाँ कोई सरकारी संसाधन मौजूद नहीं है।
2. निजी संस्थानों की 'महंगी' बैसाखी
क्षेत्र में सरकारी कॉलेज न होने का सीधा फायदा निजी स्कूलों और कॉलेजों को मिल रहा है। मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के लिए इन निजी संस्थानों की फीस भरना किसी चुनौती से कम नहीं है। जो छात्र महंगी फीस नहीं दे सकते, उनकी पढ़ाई या तो बीच में ही छूट जाती है या उन्हें मीलों दूर भटकना पड़ता है।
3. 'दूरी' बनी शिक्षा के मार्ग में बाधा
सोनौली के छात्रों को उच्च शिक्षा (12वीं के बाद) के लिए या तो नौतनवा जाना पड़ता है या फिर जिला मुख्यालय महाराजगंज और गोरखपुर का रुख करना पड़ता है।
बेटियों पर असर: सबसे ज्यादा प्रभावित लड़कियां होती हैं। सुरक्षा और लंबी दूरी के कारण कई अभिभावक अपनी बेटियों को कस्बे से बाहर भेजने में कतराते हैं, जिससे उनका भविष्य घर की चारदीवारी तक सिमट कर रह जाता है।
आर्थिक बोझ: बस का किराया और बाहर रहने का खर्च गरीब तबके के छात्रों के लिए 'सपना' बनकर रह गया है।
4. जनता की मांग: कब जागेगा प्रशासन?
स्थानीय नागरिकों और युवाओं का कहना है कि चुनाव के समय शिक्षा के बड़े-बड़े वादे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है। एक सरकारी इंटर कॉलेज और पीजी कॉलेज की स्थापना न केवल सोनौली बल्कि आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं के लिए वरदान साबित होगी।
निष्कर्ष
सोनौली का विकास केवल सड़कों और गेटों के सौंदर्यीकरण से पूरा नहीं होगा। असली विकास तब होगा जब यहाँ के युवाओं के हाथ में डिग्री होगी और उन्हें शिक्षा के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वे 25 हजार की इस आबादी की जरूरत को समझें और जल्द से जल्द यहाँ राजकीय इंटर कॉलेज एवं स्नातक महाविद्यालय की आधारशिला रखें।
"सोनौली की सीमा पर तैनात जवान देश की रक्षा करते हैं, पर यहाँ के नौजवानों के भविष्य की रक्षा तभी होगी जब उन्हें शिक्षा का अधिकार अपने घर के पास मिलेगा।"



















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