सोनौली: प्यासे राहगीरों को मुँह चिढ़ा रहा लाखों का 'वाटर एटीएम', धूल फांक रही मशीन
सोनौली (महाराजगंज)
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय मार्ग सोनौली, जहाँ से हर रोज हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक और स्थानीय लोग गुजरते हैं, वहां नगर पंचायत प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। राहगीरों को सस्ता और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों की लागत से लगाया गया 'वाटर एटीएम' आज सफेद हाथी साबित हो रहा है।
शोभा की वस्तु बनी टीएएम मशीन
सोनौली नगर पंचायत द्वारा मुख्य मार्ग पर स्थापित यह वाटर एटीएम लंबे समय से खराब पड़ा है। आलम यह है कि जिस मशीन से शीतल जल की उम्मीद थी, वह अब कूड़े और धूल से पटी पड़ी है। राहगीर प्यास बुझाने के लिए पास की दुकान से महंगी बोतलें खरीदने को मजबूर हैं, जबकि सरकार की योजना पाइपलाइनों और तकनीकी खराबी की भेंट चढ़ चुकी है।
प्रमुख समस्याएँ और जमीनी हकीकत
- रखरखाव का अभाव: स्थानीय लोगों का कहना है कि मशीन लगने के कुछ समय बाद ही इसमें तकनीकी खराबी आ गई, जिसे ठीक करने की जहमत आज तक किसी ने नहीं उठाई।
- पर्यटकों को भारी असुविधा: नेपाल जाने वाले पर्यटक जब प्यास लगने पर इस मशीन के पास पहुँचते हैं, तो उन्हें केवल निराशा हाथ लगती है।
- गंदगी का अंबार: वाटर एटीएम के आसपास सफाई न होने के कारण वहां आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है, जिससे राहगीर पास जाने से भी कतराते हैं।
"कई वर्षो से यह मशीन बंद है। नगर पंचायत सोनौली प्रशासन बस कागजों पर विकास दिखा रहा है, जमीन पर तो हमें पानी के लिए भटकना पड़ता है।" > —स्थानीय निवासी
अधिकारियों का पक्ष
जब इस संबंध में नगर पंचायत के जिम्मेदारों से बात की गई, तो हमेशा की तरह "जल्द उचित स्थान पर सुचारु" का आश्वासन मिला। हालांकि, यह 'जल्द' कब आएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
निष्कर्ष
सोनौली जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक और पर्यटन केंद्र पर बुनियादी सुविधाओं का यह हाल सिस्टम की पोल खोलता है। लाखों रुपये के सार्वजनिक धन का इस तरह बर्बाद होना न केवल लापरवाही है, बल्कि जनता की जरूरतों का मजाक उड़ाना भी है।



















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