सोनौली सीमा पर 'सिस्टम' का जाम: रेंगते ट्रक, फलते-फूलते दलाल और लाचार व्यापारी
सोनौली/महराजगंज।
भारत और नेपाल के बीच व्यापार का मुख्य द्वार कहे जाने वाली सोनौली सीमा इन दिनों अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। करीब 10 किलोमीटर लंबा मालवाहक ट्रकों का रेला इस बात की गवाही दे रहा है कि यहाँ व्यापार नहीं, बल्कि 'अवैध वसूली का खेल' सरपट दौड़ रहा है। 22 फरवरी की बड़ी दुर्घटना के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी है और सीमा पर 'वाहनों की कटिंग' का खेल बदस्तूर जारी है।
1. होली का उल्लास, सीमा पर व्यापारिक 'अकाल'
आने वाले होली पर्व को लेकर नेपाल में भारतीय सामानों की मांग बढ़ गई है। लेकिन इस बढ़ती मांग का फायदा व्यापारी कम और सरहद पर सक्रिय 'सिंडीकेट' ज्यादा उठा रहा है। बीते एक सप्ताह से सैकड़ों ट्रक सड़कों पर खड़े हैं। स्थिति यह है कि नौतनवा से लेकर सोनौली तक का इलाका ट्रकों के धुएं और जाम से कराह रहा है।
2. 'कटिंग' का खेल: रात के अंधेरे में बिकता है रास्ता, सर्विस लेन तक पर कब्ज़ा
जाम का सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक नहीं, बल्कि कृत्रिम है। आरोप है कि पुलिस और दलालों की मिलीभगत से 'वाहनों की कटिंग' का खेल चल रहा है।
- रूट का खेल: नौतनवा थाना क्षेत्र के छपवा चौकी तिराहे से गाड़ियों को कस्बे के अंदर घुसाया जाता है और रात के अंधेरे में कुनसेरवा बाईपास के रास्ते सीधे सोनौली टेंपो स्टैंड तक पहुँचा दिया जाता है।
- अवैध वसूली: जो ड्राइवर 'सेवा शुल्क' (रिश्वत) देने को तैयार हैं, उन्हें कतार तोड़कर आगे बढ़ा दिया जाता है, जबकि नियम का पालन करने वाले ट्रक चालक दिनों-दिन एक ही जगह खड़े रहने को मजबूर हैं। दिल्ली से आए ट्रक चालक सुखबिंदर सिंह का दर्द यही है— वे चार दिन से लाइन में हैं, लेकिन पैसे वाले ट्रक उन्हें पीछे छोड़कर नेपाल निकल जा रहे हैं।
3. अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँची शिकायत
नेपाल के व्यापारियों और कई संगठनों ने इस अराजकता की शिकायत काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से भी की है। व्यापारियों का कहना है कि पुलिस द्वारा जानबूझकर जाम लगवाया जा रहा है ताकि वसूली का मौका मिल सके। होली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर सामान न पहुँचने से नेपाल के बाजारों में हाहाकार मच सकता है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
4. प्रशासन का 'जांच' वाला रटा-रटाया जवाब
जब इस गंभीर स्थिति और अवैध वसूली पर सीओ नौतनवा अंकुर गौतम से बात की गई, तो उन्होंने वही पारंपरिक जवाब दिया— "शिकायत मिली है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।" सवाल यह उठता है कि जब 10 किलोमीटर लंबा जाम आंखों के सामने है और 22 फरवरी को एक बड़ी घटना घट चुकी है, तो कार्रवाई के लिए प्रशासन किस मुहूर्त का इंतजार कर रहा है?
जवाबदेही की दरकार
सोनौली सीमा की यह स्थिति उत्तर प्रदेश प्रशासन और सीमा सुरक्षा प्रबंधन पर एक गहरा धब्बा है। यदि समय रहते 'कटिंग' के इस अवैध धंधे को बंद नहीं किया गया और जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यहाँ और भी बड़ी दुर्घटनाएं और जन-आक्रोश देखने को मिल सकता है।





















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