NH-24 पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज: विकास की राह में बिछा 'मौत का जाल'
सोनौली महराजगंज।
नेशनल हाइवे 24, जो राजधानी दिल्ली को उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ता है, आज अपनी सुस्त रफ्तार और बढ़ते हादसों के कारण चर्चा में है। यहाँ जगह-जगह निर्माणाधीन ओवरब्रिज और फ्लाईओवर्स यात्रियों के लिए सुविधा कम और दुःस्वप्न ज्यादा बन गए हैं। जिसे 'रफ्तार की लाइफलाइन' होना चाहिए था, वह अब 'ब्लैक स्पॉट' में तब्दील हो चुका है।
हादसों की पटकथा लिखते 'अधूरे पिलर'
NH-24 पर सफर करने वालों के लिए सबसे बड़ी चुनौती वे हिस्से हैं जहाँ काम आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है। इन निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है:
- अपर्याप्त साइनबोर्ड: मोड़ या डायवर्जन से ठीक पहले चेतावनी देने वाले रिफ्लेक्टिव बोर्ड्स की भारी कमी है, जिससे रात के समय वाहन चालक भ्रमित हो जाते हैं।
- अंधेरे का साम्राज्य: निर्माणाधीन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था न के बराबर है। रात में अचानक सामने आने वाले बैरिकेड्स मौत का कारण बन रहे हैं।
- उड़ती धूल और लो-विजिबिलिटी: निर्माण कार्य के कारण उड़ने वाली धूल और उस पर से सर्दियों का कोहरा विजिबिलिटी को शून्य कर देता है, जिससे चेन-रिएक्शन वाले हादसे आम हो गए हैं।
बदहाल सर्विस रोड और बेतरतीब डायवर्जन
मुख्य हाईवे को रोककर ट्रैफिक को संकरी सर्विस रोड पर मोड़ दिया जाता है। ये सर्विस रोड न केवल गड्ढों से भरी हैं, बल्कि भारी वाहनों के दबाव को झेलने में भी सक्षम नहीं हैं।
एक कड़वा सच: NH-24 पर होने वाली 40% दुर्घटनाओं का सीधा संबंध खराब डायवर्जन और निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की कमी से है।
जिम्मेदार कौन?
हादसे होने पर अक्सर 'मानवीय चूक' या 'तेज रफ्तार' को दोष देकर फाइल बंद कर दी जाती है, लेकिन असली सवाल प्रशासन और निर्माण कंपनियों पर उठते हैं:
- समय सीमा का उल्लंघन: जो प्रोजेक्ट्स सालों पहले पूरे होने चाहिए थे, वे आज भी लटके हुए हैं।
- सुरक्षा ऑडिट का अभाव: क्या NHAI या स्थानीय प्रशासन इन निर्माण स्थलों का नियमित सुरक्षा निरीक्षण करता है?
- इमरजेंसी रिस्पांस की कमी: हाईवे पर एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग गाड़ियों की पहुंच आज भी उतनी प्रभावी नहीं है जितनी होनी चाहिए।
समाधान की राह: अब और कितनी जानें?
हादसों के इस सिलसिले को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है:
- स्मार्ट बैरिकेडिंग: रिफ्लेक्टर और ब्लिंकर लाइट्स का अनिवार्य उपयोग।
- मार्शल की तैनाती: व्यस्त डायवर्जन पॉइंट्स पर 24 घंटे ट्रैफिक मार्शल तैनात हों।
- भारी जुर्माना: सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वाली निर्माण कंपनियों पर भारी दंड लगाया जाए।
निष्कर्ष
विकास जरूरी है, लेकिन किसी की जान की कीमत पर नहीं। NH-24 पर अधूरे ओवरब्रिज विकास के नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता के स्मारक नजर आते हैं। अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम पुख्ता नहीं किए गए, तो ये 'शानदार हाईवे' केवल हादसों की खबरों तक सीमित रह जाएगा।



















Post a Comment