सोनौली: सरहद पर ट्रांसपोर्टरों का 'गोल्डन एम्पायर' - प्रथम 24 न्यूज़

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सोनौली: सरहद पर ट्रांसपोर्टरों का 'गोल्डन एम्पायर'


​सोनौली केवल एक सीमावर्ती कस्बा नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त व्यापारिक गलियारों में से एक है। नेपाल को होने वाले कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस व्यापार की रीढ़ यहाँ के ट्रांसपोर्टर्स हैं, जिनकी संपत्ति और रसूख आज चर्चा का विषय बना हुआ है।

​1. शून्य से शिखर तक का सफर

​एक समय था जब यहाँ परिवहन का काम सीमित था, लेकिन पिछले दो दशकों में भारत-नेपाल व्यापार में आई तेजी ने स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की किस्मत बदल दी। छोटे स्तर पर ट्रकों की बुकिंग से शुरुआत करने वाले कई लोग आज सैकड़ों ट्रकों के मालिक हैं।

  • रियल एस्टेट में निवेश: सोनौली, नौतनवा और गोरखपुर जैसे शहरों में इन ट्रांसपोर्टरों ने बड़े पैमाने पर जमीनों, होटलों और मॉल में निवेश किया है।
  • लक्जरी लाइफस्टाइल: कभी साधारण दिखने वाले इस कस्बे में आज करोड़ों की लक्जरी गाड़ियाँ और महलनुमा घर आम बात हो गए हैं।

​2. आय के मुख्य स्रोत

​इनकी 'अकूत संपत्ति' के पीछे केवल ट्रक चलाना नहीं, बल्कि एक पूरा इकोसिस्टम काम करता है:

  • कमीशन और हैंडलिंग: सीमा पार माल भेजने के लिए लगने वाले क्लियरेंस और हैंडलिंग चार्ज का एक बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट के पास जाता है।
  • वेयरहाउसिंग: सीमा के दोनों ओर बड़े-बड़े गोदामों (Warehouses) का मालिकाना हक इन रसूखदारों के पास है, जिसका किराया इनकी आय का मुख्य जरिया है।
  • विविध व्यापार: परिवहन के साथ-साथ इनका दबदबा पेट्रोल पंप, ईंट भट्ठे और शराब के कारोबार तक फैला हुआ है।

​3. रसूख और राजनीति का संगम

​सोनौली के ट्रांसपोर्टरों की संपत्ति केवल उनके बैंक बैलेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका राजनैतिक रसूख भी काफी गहरा है। स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा तक, इन व्यवसायियों की भूमिका निर्णायक होती है। यही कारण है कि प्रशासन भी कई बार इनके प्रभाव के आगे नतमस्तक नजर आता है।

एक कड़वा सच: > जहाँ एक तरफ इन ट्रांसपोर्टरों ने धन-दौलत के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय बुनियादी ढांचे (सड़कें, धूल और जाम) की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। विकास का यह 'अकूत' प्रवाह कुछ खास हाथों तक ही सीमित रह गया है।


​निष्कर्ष

​सोनौली के ट्रांसपोर्टरों की अकूत संपत्ति इस बात का प्रमाण है कि यदि सही भौगोलिक स्थिति और व्यापारिक समझ का मेल हो, तो छोटे से कस्बे से भी करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है। हालांकि, जांच एजेंसियों की नजर अक्सर इन संपत्तियों के कानूनी पहलुओं पर टिकी रहती है।


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