आस्था का सम्मान और विकास की रफ्तार: सोनौली में आपसी सहमति से शिफ्ट हुआ प्राचीन काली माता मंदिर - प्रथम 24 न्यूज़

Header Ads

आस्था का सम्मान और विकास की रफ्तार: सोनौली में आपसी सहमति से शिफ्ट हुआ प्राचीन काली माता मंदिर



सोनौली/महाराजगंज

सड़क विकास और धार्मिक आस्था के बीच जब संतुलन बैठता है, तो विवाद नहीं, समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। कुछ ऐसा ही उदाहरण महाराजगंज जिले के सोनौली कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सुकरौली में देखने को मिला। यहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग-24 (NH-24) के चौड़ीकरण की राह में आ रहे प्राचीन काली माता मंदिर को पूरे विधि-विधान और प्रशासनिक सूझबूझ के साथ नए स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

विकास की राह में 'आस्था' को मिला नया ठिकाना

​NH-24 के चौड़ीकरण का कार्य क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन सुकरौली स्थित मां काली का मंदिर इस परियोजना की जद में आ रहा था। स्थानीय लोगों की गहरी आस्था को देखते हुए प्रशासन और NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने इसे हटाने के बजाय 'स्थानांतरित' करने का संवेदनशील निर्णय लिया।

  • नया निर्माण: सड़क निर्माण एजेंसी द्वारा पहले ही मंदिर के लिए नए स्थान का चयन कर वहां भव्य निर्माण कार्य कराया गया।
  • प्राण प्रतिष्ठा: पुराने ढांचे को छूने से पहले, नए मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण अनुष्ठान के साथ मां काली की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई।

प्रशासनिक सतर्कता और ग्रामीणों का सहयोग

​मंगलवार को नायब तहसीलदार सौरभ श्रीवास्तव और NHAI के लैंड एक्विजिशन अधिकारी कलीम खान की मौजूदगी में पुराने जर्जर ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई।

"हमने धार्मिक भावनाओं का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया है। ग्रामीणों से पहले ही संवाद कर उनकी सहमति ली गई थी, जिसके बाद ही यह कदम उठाया गया।"प्रशासनिक अधिकारी


​सुरक्षा के लिहाज से मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग और पूर्व में बनी सहमति के कारण पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। जेसीबी मशीनों के जरिए पुराने ढांचे को हटाया गया, जिससे अब राजमार्ग के निर्माण में आ रही बाधा दूर हो गई है।

एक मिसाल बना सुकरौली का उदाहरण

​अक्सर देखा जाता है कि धार्मिक स्थलों को लेकर विकास कार्य रुक जाते हैं या विवाद की स्थिति बनती है, लेकिन सुकरौली में प्रशासन और जनता के बीच का 'कम्युनिकेशन' (संवाद) मिसाल बन गया है। अब मां काली का दरबार नए भव्य स्वरूप में भक्तों के लिए खुला है, और साथ ही क्षेत्र को मिलने वाली फोर-लेन सड़क का सपना भी साकार होने की ओर है।

कोई टिप्पणी नहीं

इस पोस्ट से सम्बंधित अपने विचारों से हमे अवगत जरूर कराए

टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.