सोनौली: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 'बीमार' हैं स्वास्थ्य सेवाएं, नगर पंचायत में सरकारी अस्पताल का अभाव
सोनौली (महाराजगंज):
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रमुख व्यापारिक और पर्यटन केंद्र सोनौली नगर पंचायत आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहा है। कस्बे में एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC) न होने के कारण हजारों की आबादी और प्रतिदिन आने-जाने वाले सैकड़ों पर्यटकों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
मुख्य समस्याएं: क्या हैं जमीनी हालात?
- दूरी की मार: आपातकालीन स्थिति में स्थानीय निवासियों को 7 से 10 किलोमीटर दूर नौतनवा या सीधे महराजगंज जिला अस्पताल या गोरखपुर, और नेपाल की तरफ भागना पड़ता है।
- गरीबों पर आर्थिक बोझ: सरकारी सुविधा के अभाव में लोग निजी क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाने को मजबूर हैं, जहाँ उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।
- पर्यटकों की सुरक्षा: सोनौली एक अंतरराष्ट्रीय गेटवे है। यहाँ आए दिन विदेशी पर्यटकों या यात्रियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता।
- गर्भवती महिलाओं की मुसीबत: प्रसव जैसी स्थिति में एंबुलेंस के समय पर न पहुँचने और स्थानीय स्तर पर अस्पताल न होने से महिलाओं की जान जोखिम में बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का क्या कहना है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय हर बार अस्पताल का वादा किया जाता है, लेकिन नगर पंचायत बनने के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्था शून्य है। लोगों की मांग है कि:
- सोनौली में कम से कम एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की स्थापना हो।
- 24 घंटे आपातकालीन सेवा और एंबुलेंस की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
"यह विडंबना ही है कि जहाँ से करोड़ों का व्यापार होता है, वहां एक पट्टी बांधने के लिए भी सरकारी डॉक्टर मौजूद नहीं है।" — स्थानीय निवासी



















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