नेपाल दिल दहलाने वाली घटना आई सामने दलित नाबालिग के साथ मुस्लिम समुदाय के 5 युवको ने किया दुष्कर्म
★ तथ्यों को दबाने का पीड़ित परिवार ने लगाया आरोप
★बलात्कार की घटना को नेपाल पुलिस ने मारपीट में किया प्रेषित
बांके।
घटना बांके के दुदुवा ग्रामीण नगरपालिका में हुए सामूहिक बलात्कार की है जिसको पुलिस ने सुलझाने के जगह उलझाने का प्रयास किया। घटना के विवरण के अनुसार, नेपाली कैलेंडर के अनुसार पौष 16 की रात को बांके के दुदुवा ग्रामीण नगरपालिका के खलेमसाहा में एक 16 वर्षीय दलित लड़की के साथ पांच लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया।
परिजनों द्वारा बताया गया कि, रात 11:30 बजे जब पीड़ित शौचालय गई थी, तब पांच आदमी उसे उसके घर के आंगन से उठाकर घर के पास सुनसान एक खलिहान में ले गए और उसके साथ बलात्कार किया। वही बलात्कार के बाद, लड़की के परिजनों और रिश्तेदारों ने आरोपियों की कुटाई कर स्थानीय पुलिस ने घटना की जानकारी दी।
पीड़ित परिवार के अनुसार, घटना के तुरंत बाद वे बांके पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने गए थे। लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। जब पुलिस ने शिकायत नहीं ली, तो पीड़ित परिवार काठमांडू पहुंचे और न्याय की गुहार लगाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस बीच, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने का कोई प्रयास नहीं किया।
16 पौष की रात खालेमाशाहा में घटी घटना को शुरू में 'युवकों के बीच विवाद' बताकर प्रचारित किया गया और बलात्कार की घटना को दबाने का प्रयास किया गया।
बांके जिला पुलिस कार्यालय के पुलिस अधीक्षक अंगूर जीसी कहते हैं, “17 पौष की दोपहर तक इस मामले को एक सामान्य झड़प के रूप में देखा गया। दोपहर 3 बजे पीड़िता द्वारा बलात्कार का आरोप दर्ज कराने के बाद ही जांच की दिशा बदली।”
घटना की प्रारंभिक जांच के दौरान, जीसी ने बताया कि लड़की और लड़का प्रेम संबंध में थे और इसी दौरान यह घटना घटी। उन्होंने कहा, “भले ही यह प्रेम संबंध था, फिर भी यह अपराध है क्योंकि लड़की नाबालिग है। हम जांच जारी रख रहे हैं। आरोपी सद्दाम खान का इलाज चल रहा है, उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।”
इस घटना में शामिल होने के आरोप में सद्दाम खान, मैनुद्दीन खान, समीर खान, फिरोज खान और शाहिद खान के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने लड़की का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया।
पुलिस कार्यालय के अनुसार, पीड़ित लड़की की मां के नाम से पौष 22 को डाक द्वारा शिकायत प्राप्त हुई थी। हालांकि, राष्ट्रीय दंड प्रक्रिया संहिता 2074 के अनुसार, डाक द्वारा प्राप्त शिकायत का सत्यापन होने पर ही पंजीकरण किया जाना चाहिए। इसलिए, शिकायतकर्ता से संपर्क करने का प्रयास करने पर संपर्क नहीं हो सका।
पुलिस का दावा है कि शिकायत दर्ज नहीं की जा सकी क्योंकि रिश्तेदारों, संगठनों और पड़ोसियों के माध्यम से बार-बार संपर्क करने के अनुरोध के बावजूद आरोपी कार्यालय नहीं आया। पुलिस ने चुप्पी साध रखी है और कहा है कि उन्हें सूचना मिली है कि आरोपी का इलाज भारत में चल रहा है।
नेपालगंज स्थित आईएनएसईसी नेपाल क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख केशव कोइराला कहते हैं, “धीमी आवाज में बोलना अपराध नहीं है, लेकिन न्याय की मांग में देरी पीड़ित की मजबूरी है। पुलिस जिस चीज की जांच कर रही है, उसकी जांच हम नहीं कर सकते। लेकिन एक तरफ पुलिस कहती है कि शिकायत अभी तक दर्ज नहीं हुई है। क्यों? यह समझना थोड़ा मुश्किल है।” उनका कहना है कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
वकील राम कुमार दीक्षित कहते हैं, “ऐसे मामलों में पहले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। देरी होने पर सबूत कमजोर हो जाते हैं, और यह जानबूझकर भी हो सकता है।”
घटना के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का पहला कदम माने जाने वाले पुलिस कार्यालय के चुप्पी साधने के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस से सवाल करना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों ने कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं पर आरोपियों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ने से रोकने का आरोप भी लगाया है।



















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