सोनौली: खुले नाले दे रहे हादसों को दावत, नगर पंचायत की लापरवाही से राहगीर परेशान
सोनौली।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय महत्व के नगर पंचायत सोनौली में विकास दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। कस्बे के कई वार्डों में नालों के ऊपर स्लैब न होने के कारण स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए खतरा पैदा हो गया है, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन इस गंभीर समस्या पर मौन साधे हुए है।
प्रमुख समस्याएं और खतरे
- हादसों का डर: मुख्य मार्गों और गलियों में नालों के खुले होने से आए दिन मवेशी और राहगीर चोटिल हो रहे हैं। अंधेरा होने पर स्थिति और भी भयावह हो जाती है।
- गंदगी और बीमारियां: स्लैब न होने के कारण नालों में कचरा जमा हो रहा है, जिससे पानी का बहाव रुक गया है। सड़न और बदबू से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
- व्यापार पर असर: सड़कों के किनारे खुले नालों की वजह से दुकानदारों और ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायत करने के बावजूद नगर पंचायत ने अभी तक स्लैब बिछाने का कार्य शुरू नहीं किया है। "सोनौली एक अंतरराष्ट्रीय गेटवे है, यहाँ हजारों लोगों का आवागमन रहता है, ऐसे में खुले नाले नगर की छवि को भी धूमिल कर रहे हैं।"
"नगर पंचायत केवल कागजों पर विकास कर रही है। हकीकत देखनी है तो वार्डों की सड़कों पर आएं जहाँ खुले नाले मौत का जाल बनकर तैयार हैं।" — एक स्थानीय निवासी
निष्कर्ष
यदि समय रहते इन नालों पर स्लैब नहीं डलवाए गए, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और जनता को इस समस्या से निजात दिलाता है।



















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